Last Updated: October 3, 2026

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Chandigarh में वीजा धोखाधड़ी : 102 पासपोर्ट, लैपटॉप और मोबाइल बरामद, 3 आरोपी गिरफ्तार

July 23, 2024

Chandigarh में वीजा धोखाधड़ी : 102 पासपोर्ट, लैपटॉप और मोबाइल बरामद, 3 आरोपी गिरफ्तार

चंडीगढ़ : विदेश भेजने के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन्होंने कई युवाओं से करोड़ों रुपए ऐंठकर ठगी की है। आरोपियों की पहचान जयकरण जोशी, अरशद खान और महिपाल सिंह के रूप में हुई है। जयकरण युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। अरशद खान और महिपाल ने फर्जी लैब बना रखी थी, जहां वे युवाओं का मेडिकल टेस्ट करवाते थे।

पुलिस ने कोर्ट से अनुमति लेकर सेक्टर-22 और सेक्टर-44 में आरोपियों के दो दफ्तरों की तलाशी ली। वहां से पुलिस ने 102 पासपोर्ट, लैपटॉप और मोबाइल बरामद किए। आरोपियों से अभी भी पूछताछ की जा रही है। शिकायतकर्ता आशीष शर्मा ने पिछले सप्ताह पुलिस को बताया था कि उन्होंने सात अन्य लोगों के साथ सेक्टर-9 स्थित मेसर्स गोल्डन ओवरसीज में जयकरण जोशी के माध्यम से वीजा के लिए आवेदन किया था।

फर्म संचालकों ने उनसे 8 लाख रुपये ले लिए, फिर न तो वीजा दिया और न ही पैसे लौटाए। परेशान होकर उन्होंने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने खरड़ निवासी आरोपी जयकरण जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने राजस्थान के सीकर जिले के निवासी अरशद खान और चंडीगढ़ निवासी महिपाल सिंह को गिरफ्तार किया है।

आरोपियों ने शहर के पांच सेक्टरों में छह दफ्तर बना रखे थे। ये दफ्तर सेक्टर-8सी में मेसर्स स्मार्ट वीजा प्वाइंट, मेसर्स कैनेडियन वेस्ट कंसल्टेंसी, सेक्टर-9डी में मेसर्स गोल्डन ओवरसीज, सेक्टर-20 में मेसर्स गुरु टूर एंड ट्रैवल्स, सेक्टर-22सी में मेसर्स गोल्डन ओवरसीज और सेक्टर-44 में मेसर्स वर्ल्ड इंटरनेशनल टूर एंड ट्रैवल के नाम से खोले हुए थे।

अनुभवहीन लड़कियां लेती थीं ब्लड सैंपल

वीजा आवेदकों को सेक्टर-33डी स्थित हेल्थ केयर डायग्नो लैब में भेजा जाता था। इस फर्जी लैब को अरशद खान और महिपाल चलाते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने ब्लड सैंपल लेने के लिए दो लड़कियों को रखा था। उनके पास न तो संबंधित डिग्री थी और न ही उन्हें इस काम का कोई अनुभव था। पुलिस ने उस फर्जी लैब से ब्लड सैंपल भरने के लिए कांच की शीशियां, 1600 प्री-मेडिकल जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी बरामद किए हैं। मेडिकल के नाम पर आवेदकों से 6000 से 6500 रुपए वसूले जाते थे।

 

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