जालंधरः पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही जालंधर के राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। चुन्नी लाल भगत ने अपने लंबे जीवन में कारोबार, समाजसेवा और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनका जीवन संघर्ष से शुरू होकर राजनीति के बड़े मुकाम तक पहुंचने की कहानी रहा। देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आने के बाद उन्होंने जालंधर को अपनी कर्मभूमि बनाया। यहां उन्होंने मेहनत से कारोबार खड़ा किया और बाद में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। अपनी मेहनत और जनसंपर्क के दम पर वह पंजाब विधानसभा तक पहुंचे और आगे चलकर राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
सियालकोट में जन्म, विभाजन के बाद भारत आए
चुन्नी लाल भगत का जन्म पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के बाद उन्हें अपना घर छोड़कर भारत आना पड़ा। विभाजन का समय लाखों लोगों की तरह उनके परिवार के लिए भी बेहद मुश्किल था। भारत आने के बाद उन्होंने जालंधर को अपना नया घर बनाया। उस समय परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों के आगे हार नहीं मानी। मेहनत और लगन के साथ उन्होंने जालंधर में अपने जीवन की नई शुरुआत की।
कारोबार से बनाई अपनी पहचान
जालंधर आने के बाद चुन्नी लाल भगत ने कारोबार के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने खेल सामान के कारोबार को आगे बढ़ाया और शीला स्पोर्ट्स के नाम से अपनी पहचान बनाई। कारोबार के दौरान उनका संपर्क शहर के अलग-अलग वर्गों के लोगों से बढ़ता गया। व्यापारी वर्ग के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता बढ़ी। लोगों के साथ लगातार संपर्क और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी ने उन्हें जालंधर में एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया। यही जनसंपर्क आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन में भी काफी काम आया।
1985 में पहली बार चुनावी राजनीति में उतरे
चुन्नी लाल भगत ने वर्ष 1985 में पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने जालंधर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार के बाद राजनीति से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने लोगों के बीच अपना संपर्क बनाए रखा और लगातार सक्रिय रहे। धीरे-धीरे उनका भारतीय जनता पार्टी से जुड़ाव मजबूत होता गया। उन्होंने पार्टी संगठन के लिए काम किया और जालंधर में भाजपा के आधार को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाई।
1997 में पहली बार विधायक बने
लगातार मेहनत के बाद वर्ष 1997 में उनके राजनीतिक जीवन को बड़ी सफलता मिली। उन्होंने भाजपा के टिकट पर जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।इस जीत के साथ पहली बार उन्होंने पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया। यह उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इसके बाद उन्होंने जालंधर में अपना राजनीतिक प्रभाव और मजबूत किया। वर्ष 2007 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा चुनाव जीता और विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत की।
2012 में जालंधर पश्चिम से दर्ज की जीत
विधानसभा परिसीमन के बाद जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट के क्षेत्र और स्वरूप में बदलाव हुआ। इसके बाद वर्ष 2012 में चुन्नी लाल भगत ने जालंधर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उन्होंने इस चुनाव में भी जीत दर्ज की। लगातार चुनाव जीतने के कारण उनका राजनीतिक कद बढ़ता गया और वह जालंधर के साथ-साथ पंजाब भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
विधानसभा के उपाध्यक्ष और भाजपा विधायक दल के नेता बने
चुन्नी लाल भगत को पार्टी और विधानसभा के भीतर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। वर्ष 2011 में उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्हें भाजपा विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी दी गई। इन जिम्मेदारियों से यह साफ था कि पार्टी के भीतर उनका राजनीतिक अनुभव और प्रभाव लगातार बढ़ रहा था। संगठन के साथ-साथ विधानसभा में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई थी।
बादल सरकार में बने कैबिनेट मंत्री
वर्ष 2012 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल और भाजपा गठबंधन की सरकार बनी। इस सरकार में चुन्नी लाल भगत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने स्थानीय निकाय तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान जैसे विभाग संभाले। बाद में उन्हें वन एवं वन्यजीव संरक्षण और श्रम जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी मिली। कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने सरकार में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और जालंधर की राजनीति में अपने प्रभाव को और मजबूत किया।
राजनीति के साथ समाजसेवा में भी सक्रिय रहे
चुन्नी लाल भगत की पहचान केवल एक राजनेता के तौर पर नहीं थी। कारोबार और राजनीति के साथ वह सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे। जालंधर में लंबे समय तक लोगों के बीच रहने के कारण उनका शहर के सामाजिक और कारोबारी वर्ग में अच्छा संपर्क था। यही कारण रहा कि वह स्थानीय स्तर पर एक प्रभावशाली और अनुभवी नेता के रूप में पहचाने जाते थे। उनके राजनीतिक जीवन की खास बात यह रही कि उन्होंने लंबे समय तक लोगों के बीच रहकर अपनी पहचान बनाई और संगठन से लेकर विधानसभा तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।
बेटे मोहिंदर भगत ने आगे बढ़ाई राजनीतिक विरासत
चुन्नी लाल भगत की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे मोहिंदर भगत ने भी आगे बढ़ाया। मोहिंदर भगत जालंधर पश्चिम की राजनीति में सक्रिय रहे। हालांकि बाद में उन्होंने अपने पिता से अलग राजनीतिक रास्ता चुना और आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। वर्ष 2024 में जालंधर पश्चिम विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मोहिंदर भगत ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। चुनाव जीतने के बाद उन्हें पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
बेटा मोहिंदर भगत आम आदमी पार्टी में हैं मंत्री
चुन्नी लाल भगत और उनके बेटे मोहिंदर भगत ने जालंधर की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन दोनों का राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों के साथ आगे बढ़ा। चुन्नी लाल भगत ने भाजपा के साथ रहते हुए विधायक, विधानसभा उपाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। वहीं उनके बेटे मोहिंदर भगत ने आम आदमी पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और मंत्री पद तक पहुंचे। इस तरह एक ही परिवार की दो पीढ़ियों ने जालंधर की राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण मौजूदगी दर्ज कराई।

