Last Updated: October 9, 2026

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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में वकील करेंगे Work From Home, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई

May 22, 2026

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में वकील करेंगे Work From Home, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई

पंजाब डेस्क: वैश्विक स्तर पर गहराते तेल संकट के असर अब भारत की न्यायिक व्यवस्था में भी दिखाई देने लगे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ईंधन की बचत और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। हाईकोर्ट प्रशासन ने न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बदलाव करते हुए पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने पर विशेष जोर दिया है।

हाईकोर्ट द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब अधिकतर मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। अदालत ने रजिस्ट्रारों को निर्देश दिए हैं कि सभी पक्षों को समय पर वीडियो लिंक उपलब्ध कराए जाएं और तकनीकी सहायता व्यवस्था पूरी तरह मजबूत रहे, ताकि किसी भी वकील या न्यायिक अधिकारी को वर्चुअल सुनवाई के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।

जजों को कार-पूलिंग अपनाने की सलाह

तेल की बचत को बढ़ावा देने के लिए हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों को कार-पूलिंग अपनाने की सलाह भी दी है। इसके तहत एक ही वाहन में कई जज अदालत पहुंच सकते हैं। अदालत का मानना है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े स्तर पर ईंधन बचत में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

33 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति

प्रशासनिक व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। जहां संभव होगा, वहां हाईकोर्ट की विभिन्न शाखाओं और विभागों में करीब 33 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, जरूरी कर्मचारियों की कार्यालय में मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हों।

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हर सप्ताह होगी व्यवस्था की समीक्षा

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रारों को साप्ताहिक आधार पर कार्य व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ड्यूटी रोस्टर पहले से तैयार करने और घर से काम करने वाले कर्मचारियों की फोन पर उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को तुरंत कार्यालय पहुंचना होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन शाखाओं में वर्क फ्रॉम होम प्रभावी साबित नहीं होगा, वहां इस सुविधा को सीमित या पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित रजिस्ट्रार को रजिस्ट्रार जनरल की मंजूरी लेनी होगी।

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