नई दिल्ली: भारतीय शतरंज की उभरती हुई सितारा दिव्या देशमुख ने लंदन में आयोजित फिडे विश्व रैपिड एंड ब्लिट्ज टीम चैंपियनशिप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने ब्लिट्ज सेमीफाइनल के दूसरे चरण में दुनिया की नंबर-1 महिला शतरंज खिलाड़ी होउ यिफान को पराजित कर सबको चौंका दिया। उनकी इस असाधारण जीत की सराहना खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर दिव्या की जीत की तारीफ करते हुए लिखा, “दुनिया की शीर्ष खिलाड़ी को हराना न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह हमारे देश की प्रतिभा और समर्पण का परिचायक भी है। दिव्या देशमुख को उनकी प्रेरणादायक जीत के लिए बधाई। यह सफलता युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।”
Congratulations to Divya Deshmukh on defeating the World No. 1, Hou Yifan in the 2nd leg of Blitz semifinal at the World Team Blitz Championships, London. Her success highlights her grit and determination. It also inspires many upcoming chess players. Best wishes for her future… pic.twitter.com/mjdWO0llFT
— Narendra Modi (@narendramodi) June 19, 2025
18 वर्षीय दिव्या ने ‘हेक्सामाइंड शतरंज क्लब’ का प्रतिनिधित्व करते हुए 74 चालों के संघर्षपूर्ण मुकाबले में यिफान को शिकस्त दी। ब्लिट्ज प्रारूप में दिव्या ने आठ में से छह जीत, एक ड्रॉ और केवल एक हार दर्ज करते हुए 2606 की प्रभावशाली परफॉर्मेंस रेटिंग हासिल की, जो विश्व स्तर पर उनके कौशल का प्रमाण है।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दिव्या को बधाई दी और कहा कि “उनकी जीत भारत के लिए गौरव का क्षण है।” उन्होंने दिव्या की उपलब्धि को भारतीय खेलों के लिए एक नई प्रेरणा बताया।
ब्लिट्ज मुकाबलों के बाद हुए तीसरे स्थान के प्लेऑफ में दिव्या ने अपनी टीम को उज्बेकिस्तान के खिलाफ 3.5-2.5 की जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे टीम को कांस्य पदक मिला। इससे पहले, रैपिड फॉर्मेट में भी दिव्या ने दमदार प्रदर्शन करते हुए पांच जीत, छह ड्रॉ और सिर्फ एक हार दर्ज की थी। इसके चलते भारत ने रजत पदक और दिव्या को व्यक्तिगत कांस्य पदक भी हासिल हुआ।
इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन 10 से 16 जून तक लंदन में हुआ, जिसमें कुल 5,00,000 यूरो की इनामी राशि थी। रैपिड मुकाबलों के लिए 3,10,000 यूरो जबकि ब्लिट्ज के लिए 1,90,000 यूरो तय किए गए थे।दिव्या देशमुख की यह सफलता न केवल उनके करियर के लिए मील का पत्थर है, बल्कि यह भारतीय शतरंज की शक्ति और संभावनाओं को भी दर्शाती है। देश को उनसे आने वाले वर्षों में और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद है।
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