Geeta Rani Weightlifting: भारतीय वेटलिफ्टिंग में गीता रानी का नाम एक सफल और चर्चित खिलाड़ी के तौर पर लिया जाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीते और अपनी उपलब्धियों से भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई पहचान दिलाई। उनकी मेहनत और कामयाबी ने उन्हें देश की दिग्गज वेटलिफ्टरों में शामिल किया।
गीता रानी का जन्म 16 सितंबर 1981 को पंजाब के संगरूर में हुआ था। उन्हें बचपन से ही वेटलिफ्टिंग में काफी दिलचस्पी थी और उन्होंने इसी खेल में कुछ बड़ा करने का फैसला किया। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोच सुरिंदर सिंह से वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीता ने पहली बड़ी सफलता 2003 के एफ्रो-एशियन गेम्स में हासिल की। हैदराबाद में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके बाद 2004 में एशियन चैंपियनशिप में उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा, जहां उन्होंने तीन रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
ये भी पढे़ं :–https://dainiksaveratimes.com/sports/icc-fines-pakistan-after-clean-sweep/
गीता रानी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक शामिल है। मेलबर्न में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने 75+ किलोग्राम भारवर्ग में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इस सफलता के बाद उन्हें भारत के साथ-साथ विदेशों में भी पहचान मिली। हालांकि, 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में वह पदक जीतने से चूक गईं और चौथे स्थान पर रहीं।
गीता के करियर पर विवाद का भी असर पड़ा। 2015 में राष्ट्रीय खेलों के दौरान वह प्रतिबंधित पदार्थ के लिए हुए डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाई गईं, जिसके बाद उन पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया। 2017 में उन्हें प्रतिबंध से मुक्त कर दिया गया, लेकिन इसके बाद वह राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दोबारा नजर नहीं आईं। हालांकि, उन्होंने आधिकारिक तौर पर अभी तक वेटलिफ्टिंग से संन्यास की घोषणा नहीं की है।
वेटलिफ्टिंग में उनके शानदार योगदान और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2006 में गीता रानी को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। खेल में उनकी उपलब्धियां आज भी भारतीय वेटलिफ्टिंग के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

