International Women’s Day: 2 नवंबर 2025 को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रचा। बता दें कि नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए फाइनल में भारत ने साउथ अफ्रीका को हराकर पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। कप्तान हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में टीम ने न सिर्फ भारत का बल्कि पूरे एशिया का नाम रोशन किया।
आठ खिलाड़ियों का कमाल
1. हरमनप्रीत कौर: टूर्नामेंट की शुरुआत मुश्किल रही, लेकिन कप्तान ने 9 मैचों में 260 रन बनाए और सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 89 रनों की पारी खेली। उनकी कप्तानी ने टीम को अंतिम तक जोड़े रखा।
2. स्मृति मंधाना: 9 मैचों में 434 रन बनाकर टीम की सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बनीं। उन्होंने लगातार पार्टनरशिप दी और टीम की शुरुआत मजबूत की।
3. प्रतिका रावल: शुरुआती ओपनिंग पार्टनर के रूप में 7 मैचों में 308 रन बनाए। न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जमाकर सेमीफाइनल की राह आसान की। चोट के कारण नॉकआउट में नहीं खेल सकीं, लेकिन नींव मजबूत की।
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4. शेफाली वर्मा: चोटिल प्रतिका की जगह खेलीं और फाइनल में 87 रन बनाकर टीम को मजबूत आधार दिया। उन्होंने 2 विकेट भी लिए और प्लेयर ऑफ द मैच बनीं।
5. जेमिमा रोड्रिग्स: मिडिल ऑर्डर में 8 मैचों में 292 रन बनाए। सेमीफाइनल में 127 रन नाबाद खेलकर टीम को जीत दिलाई।
6. ऋचा घोष: विकेटकीपर और निचले ऑर्डर की बल्लेबाज ने 235 रन बनाए और उच्च स्ट्राइक रेट से टीम को मजबूत किया।
7. दीप्ति शर्मा: ऑलराउंडर दीप्ति ने 215 रन बनाए और 22 विकेट लिए। फाइनल में 58 रन और 5/39 की गेंदबाजी से टीम की जीत सुनिश्चित की।
8. श्री चरणी: मिडिल ओवर में नियंत्रण वाली गेंदबाजी करते हुए 9 मैचों में 14 विकेट लिए और कई मैचों में भारत को जीत दिलाई।
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भारतीय महिला क्रिकेट का सुनहरा युग
इन आठों खिलाड़ियों की मेहनत, रणनीति और खेल भावना ने भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाया। हरमनप्रीत की कप्तानी, स्मृति की क्लास, शेफाली की आक्रामकता, जेमिमा का धैर्य, दीप्ति का ऑलराउंड प्रदर्शन, ऋचा की पावर, प्रतिका की स्थिरता और श्री चरणी की रणनीति ने टीम को इतिहास रचने वाली टीम बनाया। यह जीत सिर्फ एक टूर्नामेंट का नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के सुनहरे युग की शुरुआत है।
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