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अमृतसरः नवंबर 1984 में दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में उस समय की कांग्रेस सरकार की शह पर हुए सिख कत्लेआम के निशान आज भी ताज़ा हैं और दुख की बात है कि चार दशक से ज़्यादा समय बीत जाने के बावजूद पीड़ित सिख परिवारों को इंसाफ़ नहीं मिल पाया है। यह बात शिरोमणि.