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सभ्यता की चकाचौंध के बीच दुनिया एक खामोश त्रासदी जी रही है। खेतों में रिकॉर्ड अनाज उग रहा है, खाद्य कंपनियां लगातार विस्तार कर रही हैं और बाजार रंग-बिरंगे पैकेटों से भरे पड़े हैं, फिर भी करोड़ों लोग भूख की यातना सहने को मजबूर हैं। विकास के खोखले मॉडल की हार यह केवल आर्थिक विषमता.