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नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि एक व्यक्ति की यौन प्रकृति जन्मजात है न कि शहरी या अभिजात्य। शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी केंद्र सरकार के उस तर्क को खारिज करती है जिसमें उसने कहा था कि समलैंगिक विवाह “सामाजिक स्वीकृति के उद्देश्य के लिए केवल शहरी अभिजात्य दृष्टिकोण” है। मुख्य न्यायाधीश.