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कुछ साल पहले तक भारतीय सरकारी दफ्तरों में एक सूक्त वाक्य लिखा मिलता था, आराम हराम है। यह कथन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का है। शायद स्वाधीन भारत के लिए अहर्निश मेहनत और काम की जरूरत थी, ताकि सैकड़ों साल की गुलामी से उबरे भारत को आर्थिक रूप से पटरी पर लाया.