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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिना किसी वास्तविक आस्था के केवल आरक्षण का लाभ पाने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन ‘संविधान के साथ धोखाधड़ी’ है। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस आर. महादेवन ने सी. सेल्वरानी की याचिका पर 26 नवंबर को यह फैसला सुनाया तथा मद्रास हाईकोर्ट.