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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपने एक ‘ऐतिहासिक फैसले’ में कहा कि बच्चों के साथ यौन-क्रिया के स्पष्ट चित्रण और उनसे संबंधित अपमानजनक सामग्री को रखना या देखना अपराध माना जाएगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पार्दीवाला की पीठ ने गैर सरकारी संगठन ‘जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ की.