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Far from contentment, near crisis : जब संबंधों की जड़ें स्वार्थ की धूप में सूखने लगती हैं, तब सभ्यताओं का मौन पतन शुरू हो जाता है। भारतीय समाज आज उसी सांस्कृतिक क्षरण के दौर से गुजर रहा है, जहाँ त्याग, मर्यादा और आत्मसंयम जैसे जीवन-मूल्य धीरे-धीरे भौतिक आकर्षणों की चमक में धुंधले पड़ते जा रहे.