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जब कैलेंडर की तारीखें आखिरी मुकाम पर होती हैं, उस वक्त हर कोई के जेहन में दो ही बात होती है, पहली कि बीते हुए साल में उसने क्या खोया और क्या पाया। साथ ही उसकी निगाह आने वाले वक्त और उसके जरिए निजी और सामजिक जीवन की उन उपलब्धियों पर होती है, जिन्हें भावी.