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अंबाला। तपता आसमान सिर्फ मौसम का मिजाज नहीं, बल्कि एक संकट है जो हमारी सांसों, श्रम और अस्तित्व को चुपचाप निगल रहा है। आसमान की तीखी तपिश एक अदृश्य आपदा बन चुकी है, जिसने भारत में जीवन के संतुलन को डगमगा दिया है। अब सहनशील नहीं रही गर्मी जलवायु परिवर्तन के इस दौर में गर्मी.