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सृष्टकर्त्ता परमेश्वर ने जब दृष्यमान संसार की रचना की उस समय से ही इसके संरक्षण के लिए और समय-समय पर आई दुर्बलताओं का निवारण करने हेतु आप स्वयं निर्गुण से सगुण रूप धारण कर संसार में आए अथवा अपने स्वरूप से अभेद हो चुके महापुरुषों को यहां भेजते रहे। सत्युग में वामन, त्रेता में श्रीराम,.