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नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने भारत और यूरोप में ‘टाइप-2’ मधुमेह के विभिन्न स्वरूपों में आनुवंशिक समानताएं और अंतर पाया है और उनका कहना है कि इसका उपयोग देश में इस रोग के उपचार को और बेहतर बनाने में किया जा सकता है। स्वीडन में शोधकर्ताओं ने पूर्व में यह प्रदर्शित किया था कि मधुमेह को.