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आज के दौर में आमने-सामने के युद्ध की प्रासंगिकता नहीं रही। अगर किसी देश ने किसी के आंतरिक मामले में सीधे और सैनिक हस्तक्षेप की कोशिश करता भी है तो उसकी कामयाबी की कोई गारंटी नहीं रह जाती। कुछ साल पहले अमेरिका का खाड़ी युद्ध हो या फिर अफगानिस्तान में सीधी कार्रवाई, इसका कोई ठोस.