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एक दार्शनिक गांव के एक किनारे छोटी-सी कुटिया में रहते हुए अहर्निश आत्मानुभव में लीन रहा करता था। कभी-कभी जब लोग उसके दर्शनों के लिए आते तो अपने अमृतमय शब्दों में उन्हें वह आनन्दित कर देता। उसकी ख्याति दूर-दूर तक फैल गई और लोगों में वह सम्माननीय साधु के रूप में स्थापित हो चुका था।.