Taapsee Pannu: अभिनेत्री तापसी पन्नू अपनी आगामी एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘गांधारी’ की रिलीज को लेकर तैयार हैं। अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने अपने करियर में हमेशा बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से ज्यादा फिल्मों की क्वालिटी को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि किसी फिल्म की सफलता का आकलन केवल उसकी कमाई से नहीं किया जाना.
Subhash Ghai: अभिनेता श्रेयस तलपड़े अपने अभिनय से भारतीय सिनेमा में खास पहचान रखते हैं। निर्देशक सुभाष घई ने अभिनेता की सराहना करते हुए बताया कि वे अपने दमदार अभिनय से हर किसी को चौंका देते हैं। निर्देशक ने इंस्टाग्राम पर श्रेयस तलपड़े की तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर लिखा, “चाहे फिल्म ‘इकबाल’ हो, ‘अपना.
Jackie Shroff: सिनेमा समाज का एक आईना होता है, जो अपनी कहानियों के जरिए उन आवाजों और सच को सामने लाता है जो अक्सर कहीं दबरकर रह जाती है। साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म ‘लज्जा’ इसका बड़ा उदाहरण है। सोमवार को फिल्म ने अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर.
Shailendra: जीवन में आई कठिन परिस्थितियां, लोगों के लिए नए अवसर लेकर आती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है देश के प्रमुख और लोकप्रिय हिंदी-उर्दू कवि, गीतकार और फिल्म निर्माता शंकरदास केसरीलाल शैलेंद्र की। गीतकार शैलेंद्र का जन्म 30 अगस्त 1923 को रावलपिंडी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका परिवार मूल रूप.
Hrishikesh Mukherjee: 27 अगस्त सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की पुण्यतिथि है, जिसने हिंदी सिनेमा को न सिर्फ एक अलग नजरिए से देखा, बल्कि दर्शकों को भी दिखाया। हम बात कर रहे हैं ऋषिकेश मुखर्जी की, जिन्हें प्यार से लोग ऋषि दा कहते थे। 27 अगस्त 2006 को वह इस दुनिया से.
Anupam Kher: अभिनेता अनुपम खेर पिछले कई दशकों से मनोरंजन जगत में राज कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने एक अभिनेता की खूबियों पर चर्चा की। उनका कहना है कि एक एक्टर व्यक्ति के उन सभी भावनाओं को पर्दे पर उतारता है, जिसे लोग जल्दी बाहर नही लाते हैं। अभिनेता अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर.
Shruti Deshpande: अभिनेत्री श्रुति देशपांडे ने थिएटर नाटक ‘नकाब’ में अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ स्टेज शेयर किया है। अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत में नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ काम करने के अनुभव को शेयर करते हुए बताया कि वे अपने काम में हर बार कुछ नयापन जरूर लेकर आते हैं। अभिनेत्री ने बताया, “नवाजुद्दीन.
1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए।