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नई दिल्ली: भारत में करीब 3000 से भी ज्यादा वर्षों से इस जड़ी बूटी का प्रयोग किया जाता है। इसे ‘हृदय की जड़ी बूटी’ या ‘दिल का राजा’ भी कहते हैं। यह हृदय का खास ख्याल रखता है। आयुर्वेद के दो महान आचार्यों चरक और सुश्रुत ने इसका वर्णन किया है, तो वहीं अष्टांग हृदयम.