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आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। सुबह उठते ही फोन देखना और रात को सोने से पहले तक स्क्रीन पर बने रहना अब आम आदत बन गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बढ़ता स्क्रीन टाइम हमारी सोच और व्यवहार को बदल.