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नई दिल्ली: वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ के समक्ष अपने जवाबी तर्क में दलील दी कि संविधान की ‘भावनात्मक बहुसंख्यकवादी व्याख्या‘ नहीं हो सकती और इस मामले में समीक्षा की जरूरत है। व्याख्या ‘पाठ पढ़ें, संदर्भ समझें और अनुच्छेद.