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शिव का एक रूप नटराज का है। नट से तात्पर्य कला, नर्तक, नृत्य से और राज का अधिपति अथवा स्वामी समझा जाना चाहिए। शिव सृष्टि के आदि कारण हैं। सर्जना होने के पत्तत भी सृष्टि गतिहीन थी। सृष्टि की सर्वोच्च कृति मनुष्य भी निस्पंद था। गतिशीलता के लिए शिव ने नृत्य के द्वारा ज्ञान दिया।.