-
नई दिल्ली: भारत के प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई ने रविवार को कहा कि कानूनी सहायता महज परोपकार का कार्य नहीं है, बल्कि एक नैतिक कर्तव्य है और कानूनी सहायता अभियान में लगे लोगों को प्रशासनिक कल्पना के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि देश के हर कोने तक कानून का.