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From public trust to public representation : लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति चुनाव नहीं, संवाद है। चुनाव सत्ता तय करते हैं, लेकिन संवाद लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखता है। यही संवाद संसद में आकार लेता है, जहाँ केवल विधेयकों पर बहस नहीं, बल्कि राष्ट्र की दिशा, समाज की प्राथमिकताएँ और भविष्य की रूपरेखा तय.