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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार सत्ता परिवर्तन केवल चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि प्रतीकों, भावनाओं और सांस्कृतिक संदेशों के नए दौर की शुरुआत है। 15 वर्षों तक राज्य की राजनीति पर ममता बनर्जी की सत्ता के अंत और भाजपा के बहुमत के साथ उभरने के बाद अब हर राजनीतिक कदम अपने भीतर गहरे.