-
करनाल। भारत का बासमती चावल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में देश की साख का प्रतीक है। वर्ष 2025 में ₹50,000 करोड़ और वर्ष 2026 में रिकॉर्ड ₹55,000 करोड़ का विदेशी मुद्रा राजस्व देश के खजाने में लाने वाला यह उद्योग इस समय एक अभूतपूर्व भू-राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस गया। मिडिल ईस्ट.