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‘न्यू ईयर मनाना कोई गर्व की बात नहीं, नए साल के जश्न को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना ने जारी किया फतवा

December 29, 2024

‘न्यू ईयर मनाना कोई गर्व की बात नहीं, नए साल के जश्न को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना ने जारी किया फतवा

बरेली (उत्तर प्रदेश): ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने रविवार को नए साल के जश्न के खिलाफ फतवा जारी किया, जिसमें मुसलमानों को इसे मनाने से हतोत्साहित किया गया, इसके बजाय उन्हें अपने धर्म से जुड़ी धार्मिक प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। रजवी के अनुसार, चश्मे दरफ्ता बरेली द्वारा जारी फतवा में युवा मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं दोनों से नए साल के जश्न में भाग लेने से परहेज करने का आग्रह किया गया।

रजवी ने कहा, “नए साल का जश्न मनाने वाले युवा पुरुषों और महिलाओं को इस फतवे में निर्देश दिया गया है कि नए साल का जश्न मनाना गर्व की बात नहीं है और न ही इस जश्न को मनाया जाना चाहिए और न ही इसकी बधाई दी जानी चाहिए।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नया साल ईसाई कैलेंडर या “अंग्रेजी वर्ष” की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की गैर-धार्मिक प्रथाएं “मुसलमानों के लिए सख्त वर्जित हैं।”

रजवी ने युवा मुस्लिम लोगों से नए साल के जश्न में भाग लेने से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि मुसलमानों को इसके बजाय उन धार्मिक प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो उनके धर्म से मेल खाती हैं। उन्होंने कहा, “नए लड़कों और लड़कियों को नए साल का जश्न न मनाने का निर्देश दिया गया है… मुसलमानों को नए साल का जश्न मनाने से बचना चाहिए।”

इस बीच, लेखक सलमान रुश्दी की किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के देश में “प्रतिबंधित” होने के तीन दशक बाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध होने की खबरों के बीच बरेलवी ने अपना विरोध जताया और कहा कि “प्रतिबंध जारी रहना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पुस्तक की बिक्री की अनुमति देने से पहले प्रतिबंध की मांग करने वाले लोगों से बातचीत होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “बातचीत होनी चाहिए थी, क्योंकि इसमें मुस्लिम दृष्टिकोण है।”

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पुस्तक की उपलब्धता “देश के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकती है”।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि जिस तरह से तत्कालीन सरकार ने अस्सी के दशक में प्रतिबंध लगाया था, उसी तरह यह प्रतिबंध जारी रहना चाहिए।’’

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