Last Updated: September 25, 2026

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर पहली बार बोले CM योगी, ‘हर कोई खुद को नहीं लिख सकता शंकराचार्य’

February 14, 2026

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर पहली बार बोले CM योगी, ‘हर कोई खुद को नहीं लिख सकता शंकराचार्य’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी पद की गरिमा नियमों और परंपराओं से तय होती है। जैसे कोई भी व्यक्ति खुद को मुख्यमंत्री, मंत्री या किसी राजनीतिक दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं कह सकता, वैसे ही कोई भी स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर पद के लिए एक तय प्रक्रिया और व्यवस्था होती है, और सभी को उसका पालन करना जरूरी है।

शंकराचार्य पद की मर्यादा और परंपरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य का पद बहुत ऊंचा और सम्मानित माना जाता है। लेकिन इस पद पर वही व्यक्ति बैठ सकता है, जिसे विधि-विधान और मान्यता के अनुसार विद्वत परिषद अधिकृत करे। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य बनने की एक स्थापित प्रक्रिया है। परंपरा और नियमों के आधार पर ही किसी को यह पद मिलता है। इसलिए कोई भी व्यक्ति अपने मन से यह पद नहीं ले सकता।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी, ताकि सनातन परंपरा को एक मजबूत और संगठित स्वरूप मिल सके।

 

चारों पीठ इस प्रकार हैं

-उत्तर दिशा में ज्योतिष पीठ

-दक्षिण में श्रृंगेरी पीठ

-पूर्व में जगन्नाथ पुरी पीठ

-पश्चिम में द्वारिका पुरी पीठ

उन्होंने बताया कि इन चारों पीठों का संबंध चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद से है। आज भी इन पीठों की परंपरा विद्वत परिषद और तय मानकों के अनुसार ही चलती है।

 

मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा स्वयं नियमों और परंपराओं से चलती है। उसी तरह पूरे प्रदेश में कानून का शासन है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। सभी लोग संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हैं और उसका पालन करना हर किसी की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि किसी भी व्यक्ति को नियमों को तोड़ने की छूट नहीं दी जा सकती।

 

माघ मेले की घटना…
मुख्यमंत्री ने बताया कि माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन लगभग 4.50 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीच अगर कोई व्यक्ति निकास द्वार से प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो भगदड़ की स्थिति बन सकती है और श्रद्धालुओं की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़े?

 

विपक्ष पर लागाया ये आरोप
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों दर्ज की गई थी?उन्होंने विपक्ष से कहा कि नैतिकता की बात करने से पहले अपने कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। पूजा करना किसी की आस्था हो सकती है, लेकिन सरकार कानून के अनुसार काम करती है।

 

अन्य मुद्दों पर भी भ्रम फैलाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े मामलों में भी विपक्ष ने भ्रम फैलाने का काम किया। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि लोगों को गुमराह करने के बजाय देश और प्रदेश के विकास के बारे में सोचना चाहिए।

 

आस्था और विकास साथ-साथ
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास मॉडल में आस्था और विकास दोनों को साथ लेकर चला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की सरकार ने राम मंदिर अयोध्या, काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा-वृंदावन के विकास का विरोध किया था। उनके अनुसार, पहले जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर रोक लगाई गई, कांवड़ यात्रा में बाधाएं डाली गईं और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा भी रोकी गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन आस्था को कोई भी कैद नहीं कर सकता। दीपोत्सव और रंगोत्सव जैसे कार्यक्रमों से करोड़ों लोग जुड़ रहे हैं, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी में भी बढ़ोतरी हो रही है।

 

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