यूपी डेस्क। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती आज अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। इस खास मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य व लंबी उम्र की कामना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वे प्रभु श्रीराम से मायावती के दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
बसपा ने जिलों में आयोजित किए विशेष कार्यक्रम
मायावती के जन्मदिन के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी की ओर से प्रदेश भर के जिलों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने इस दिन को संगठनात्मक रूप से मनाया। राजधानी लखनऊ में मायावती पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को संबोधित करेंगी। इस दौरान वे पार्टी के भविष्य की रणनीति और आगे के राजनीतिक रोडमैप को भी साझा करेंगी।
15 जनवरी 1956 को हुआ था मायावती का जन्म
बसपा सुप्रीमो मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में एक साधारण परिवार में हुआ था। आज 15 जनवरी 2026 को उन्होंने अपने जीवन के 70 वर्ष पूरे कर लिए हैं। राजनीति में आने से पहले मायावती एक शिक्षिका के रूप में काम कर चुकी हैं। उनका झुकाव सामाजिक न्याय और समानता की ओर था, जिसने उन्हें राजनीति की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कांशीराम से मिली राजनीति की दिशा
मायावती बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम से काफी प्रभावित थीं। उन्हीं के मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। जल्द ही मायावती पार्टी की प्रमुख नेता बनकर उभरीं और कांशीराम की राजनीतिक उत्तराधिकारी मानी जाने लगीं।
40 साल की उम्र में बनीं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री
मायावती ने मात्र 40 वर्ष की उम्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वे कुल चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रहीं और भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी उन्हें हासिल है।
2007–2012 का कार्यकाल रहा खास
मायावती का 2007 से 2012 तक का कार्यकाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इस दौरान बसपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। उन्होंने दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की सोशल इंजीनियरिंग के जरिए एक नया राजनीतिक प्रयोग किया, जो उस समय सफल रहा।
सख्त प्रशासन और मजबूत कानून व्यवस्था की पहचान
प्रशासनिक दृष्टि से मायावती को एक “आयरन लेडी” के रूप में जाना जाता है। उनके शासनकाल में सख्त प्रशासन और बेहतर कानून-व्यवस्था देखने को मिली।
स्मारकों और विकास कार्यों को लेकर रही चर्चा
मायावती के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे, पार्क और स्मारकों का निर्माण कराया गया। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम के सम्मान में बनाए गए भव्य स्मारक प्रमुख हैं। हालांकि, इन स्मारकों पर हुए भारी खर्च को लेकर उन्हें कई बार आलोचनाओं और विवादों का सामना भी करना पड़ा।
आज भी दलित समाज की मजबूत आवाज मानी जाती है
आज भी मायावती भारतीय राजनीति में करोड़ों वंचितों और दलितों के लिए आत्मसम्मान और संघर्ष का प्रतीक मानी जाती हैं। बसपा की सर्वोच्च नेता के रूप में उनकी भूमिका अभी भी बेहद अहम है और उनके राजनीतिक फैसलों पर पूरे देश की नजर बनी रहती है।

