Last Updated: September 20, 2026

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अंबेडकर जयंती पर मायावती ने अर्पित की श्रद्धांजलि, कहा-सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति कारवां चलता रहेगा

April 14, 2026

अंबेडकर जयंती पर मायावती ने अर्पित की श्रद्धांजलि, कहा-सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति कारवां चलता रहेगा

लखनऊः भारत रत्न और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती उत्तर प्रदेश के साथ पूरे देश में मनाई जा रही है। इसी कड़ी में दलितों की नेता और बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने आवास पर डॉ. अंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इस मौके पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं के नाम संदेश जारी किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि देश की सरकारें बाबा साहेब के सर्वजन-हितैषी और समतामूलक संविधान के उद्देश्यों को ईमानदारी से लागू करतीं, तो आज भारत गरीबी, बेरोजगारी, भेदभाव और अन्याय से मुक्त एक सशक्त, आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित हो चुका होता।

 

मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, “विशाल आबादी वाले अपने भारत देश में ’बहुजन समाज,’ अर्थात बहुजनों के मसीहा, भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर प्रातः मेरे द्वारा शत्-शत् नमन, पुष्पांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ ही बसपा के लोगों द्वारा पूरे देश भर में ख़ुद व अपने परिवार सहित उन्हें पूरी मिशनरी भावना के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के लिये सभी लोगों का तहेदिल से आभार, शुक्रिया एवं धन्यवाद।”

बसपा सुप्रीमो ने आगे लिखा है, “सर्वविदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर का पूरा जीवन देश के गरीबों, उपेक्षितों, शोषितों तथा जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं आदि समेत ’बहुजन समाज’ की सुरक्षा, सम्मान व उत्थान के लिये अत्यन्त ही कड़े संघर्ष में बीता, अन्ततः जिसकी गारंटी उन्होंने संविधान में सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कार्य किया और अमर हो गये और जिसके लिये देश हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा।

लेकिन देश की केन्द्र व यहां राज्यों की सत्ता में रहने वाली पार्टियां बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अति-मानवतावादी, सर्वजन-हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान के पवित्र उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल हो पातीं तो भारत अभी तक स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर व विकसित देश बनकर यहां के करोड़ों बहुजनों की अपार गरीबी, बेरोजगारी, जातिवादी द्वेष, शोषण व जुल्म-ज्यादती आदि से मुक्त समता एवं न्याय-युक्त जीवन लोगों को जरूर दे पाता। अगर ऐसा नहीं हो पाया है तो क्यों? इसका जवाब ढूंढने पर देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर का ‘सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ का कारवां चुनावी सफलता भी हासिल करके अपनी मंजिल की ओर जरूर आगे बढ़ेगा।”

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