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पुलिस ने भाकियू अध्यक्ष नरेश चौधरी को नोएडा जाने से रोका

December 5, 2024

पुलिस ने भाकियू अध्यक्ष नरेश चौधरी को नोएडा जाने से रोका

अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष नरेश चौधरी समेत अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को पुलिस ने नोएडा जाने से रोक दिया।

नोएडा में चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए बृहस्पतिवार को नरेश चौधरी ने गजरौला से कूच करने का ऐलान किया था लेकिन पुलिस ने बुधवार की रात 11 बजे ही चौधरी को उनके आवास मोहल्ला चौधरी चरण सिंह नगर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजयवीर सिंह को किसान भवन दरियापुर एवं मुख्य सचिव अरुण सिद्धू को कांप्लेक्स गजरौला पर नजर बंद कर दिया गया था।

चौधरी ने कहा कि किसान भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा और फसलों के सही दाम की मांग को लेकर दिल्ली कूच कर सरकार को जगाना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है। राष्ट्र की राजधानी किसी की बपौती नहीं है फिर ऐसे में किसान दिल्ली क्यों नहीं जा सकते।

उन्होंने कहा कि बैरिकेडिंग,वाटर कैनन, दंगा नियंत्रण वाहन तथा पुलिस बल की तैनाती देखकर लगता है कि सरकार किसानों की बात सुनना नहीं चाहती हैं। उन्होने आरोप लगाया कि किसान व खेती खत्म करने के लिए इससे पहले भी तीन काले कानून बनाए थे।किसानों के आंदोलन के बाद सरकार ने 19 नवंबर 2021 में तीनों कानून वापस ले लिए थे।उसी समय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक समिति का गठन किया गया था। समिति के गठन के तीन साल बाद भी सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी देने में बुरी तरह विफल रही है।

इस तरह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश अनुसार किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी न देकर किसानों के साथ धोखा किया गया है।अब दिसंबर माह में एसकेएम द्वारा दिल्ली कूच का ऐलान किया गया है तो सरकार किसानों के संघर्ष को बर्बरतापूर्ण दबाने का प्रयास कर रही है। यदि सरकार किसानों का आंदोलन समाप्त करवाना चाहती है तो उसे तुरंत किसानों से बात करनी चाहिए और एमएसपी गारंटी कानून लागू कर मांगे पूरी करे। श्री चौधरी ने कहा कि हर बार सरकार झूठा वादा करके किसानों के संघर्ष को दबाने का इसी तरह प्रयास करती है।

उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर न तो खाद मिलती है, और न किसान की कहीं कोई सुनवाई होती है। भाकियू संयुक्त मोर्चा की मांग है कि नोएडा के किसानों को ज़मीन के बदले 10 फीसदी निर्मित प्लाट,64 फीसदी बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाए,जितने किसान जमीन छिन जाने से भूमिहीन हुए हैं उनके परिवार के बच्चों को केंद्र सरकार और राज्य सरकार कोई न कोई रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

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