Last Updated: September 20, 2026

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सड़क के गड्ढे भी अच्छे होतें है! जानें कैसे एंबुलेंस में पड़ी ‘ब्रेन डेड’ घोषित महिला हुई जिंदा

March 13, 2026

सड़क के गड्ढे भी अच्छे होतें है! जानें कैसे एंबुलेंस में पड़ी ‘ब्रेन डेड’ घोषित महिला हुई जिंदा

उत्तर प्रदेश: आमतौर पर सड़क के गड्ढों को हादसों और परेशानियों की वजह माना जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया। यहां सड़क के एक गड्ढे से लगा झटका एक महिला के लिए मानो जीवनदान बन गया। अस्पताल द्वारा ‘ब्रेन डेड’ घोषित की जा चुकी महिला ने एंबुलेंस में अचानक सांस लेना शुरू कर दिया।

Pilibhit Brain-dead woman pothole
Pilibhit Brain-dead woman pothole

अचानक गिरने से बिगड़ी थी तबीयत

पीलीभीत के ज्यूडिशियल कोर्ट में कार्यरत 50 वर्षीय विनिता शुक्ला 22 फरवरी को घर पर अचानक चक्कर खाकर गिर गई थीं। बताया जाता है कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था और उन्होंने दवा ली थी। दवा लेने के कुछ ही देर बाद वह बेहोश हो गईं। परिवार के लोग तुरंत उन्हें स्थानीय अस्पताल लेकर गए, जहां से हालत गंभीर बताते हुए उन्हें बरेली रेफर कर दिया गया।

डॉक्टरों ने बताया था ‘उम्मीद नहीं’

बरेली के एक अस्पताल में दो दिन तक इलाज के बाद डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि मरीज की हालत बेहद गंभीर है और उनके बचने की संभावना बहुत कम है। परिजनों के अनुसार 24 फरवरी को उन्हें घर ले जाने की सलाह दे दी गई। परिवार वाले विनिता को एंबुलेंस से पीलीभीत वापस ला रहे थे, ताकि घर पर अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा सकें।

रास्ते में गड्ढे से लगा झटका और चलने लगी सांस

परिजनों के मुताबिक बरेली-हरिद्वार नेशनल हाईवे (NH-74) पर सड़क निर्माण का काम चल रहा था। इसी दौरान एंबुलेंस का टायर एक गड्ढे में पड़ गया और जोर का झटका लगा। उसी समय विनिता के शरीर में हलचल महसूस हुई और उन्होंने सांस लेना शुरू कर दिया। यह देखकर परिवार हैरान रह गया और तुरंत उन्हें पीलीभीत में न्यूरो सर्जन डॉ. राकेश सिंह के पास ले जाया गया।

मेडिकल जांच में सामने आई असली वजह

डॉ. राकेश सिंह ने जांच के बाद बताया कि मरीज में ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्स नहीं मिल रहे थे और उनका ग्लासगो कोमा स्केल (GCS) स्कोर सिर्फ 3 था, जो गहरे कोमा की स्थिति को दर्शाता है। आंखों की पुतलियां भी रोशनी पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं। जांच में यह भी सामने आया कि उनके खून में न्यूरोटॉक्सिन मौजूद थे, जिसने नर्वस सिस्टम को प्रभावित किया था।

एक हफ्ते में सुधरी हालत

डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। करीब एक सप्ताह बाद विनिता ने सामान्य रूप से सांस लेना शुरू कर दिया। लगभग 10 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उनकी स्थिति स्थिर हो गई और अब वह घर लौट चुकी हैं।

महिला ने कहा- “मैं अब पूरी तरह स्वस्थ हूं”

विनिता शुक्ला का कहना है कि उन्हें उस दौरान की कोई याद नहीं है। परिवार ने उन्हें बाद में पूरी घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब वह खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रही हैं और डॉक्टर को भगवान जैसा मानती हैं।

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मामला बना चर्चा का विषय

यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, वहीं डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज और सही जांच के कारण महिला की जान बच पाई।

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