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UGC के खिलाफ सड़कों पर उतरे सवर्ण समाज के लोग, 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होनी है सुनवाई

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UGC: लखनऊ में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नियम भेदभावपूर्ण हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। परिवर्तन चौक से शुरू हुए इस विरोध मार्च को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए। बड़ी संख्या में पुलिस बल, वरिष्ठ अधिकारी और RAF की तैनाती की गई थी, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भीड़ की संख्या को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा कड़ा रखा गया।

देशभर में उठी आपत्ति
UGC के नए प्रावधानों को लेकर इससे पहले उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। मामला अब न्यायिक दायरे में पहुंच चुका है और इस पर सुनवाई जारी है।

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सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नए नियमों के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा रखी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया नियम अस्पष्ट प्रतीत होते हैं और इनके व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इनका असर समाज को विभाजित करने वाला हो सकता है।

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और UGC से 19 मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा है। तीन अलग-अलग याचिकाओं में यह आपत्ति उठाई गई है कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक सीमित कर दिया गया है, जिससे अन्य वर्गों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है।

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2012 के नियम बहाल
अदालत ने नियम 3(1)(सी) के तहत सामान्य श्रेणी को संरक्षण से बाहर रखने वाली परिभाषा को स्थगित करते हुए 2012 के विनियमों को अगले आदेश तक लागू रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक पुराना ढांचा प्रभावी रहेगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजरें 19 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि UGC के नए नियमों का भविष्य क्या होगा।

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