न वाहन, न कर्मचारी, क्या करें Traffic Police बेचारी, पैट्रोलिंग गाड़ियों और स्टाफ की कमी से जुझ रहा ट्रैफिक विंग

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शिमला : राजधानी में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए भले ही ट्रैफिक पुलिस बड़े दावे कर रही हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। बिना पैट्रोलिंग वाहन के ट्रैफिक पुलिस राजधानी में यातायात नियंत्रण कार्य में जुटी है, इससे साफ जाहिर होता है कि अन्य जिलों ट्रैफिक पुलिस की क्या व्यवस्था रहती होगी। पैट्रोलिंग गाड़ियों और स्टाफ की कमी से जुझ रहा ट्रैफिक विंग पंगू बन कर रह गया है। कहने को तो ट्रैफिक पुलिस के पास 16 दोपहिया वाहन, 170 जवान है, लेकिन यातायात व्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए यह नाकाफी है। बात करें ट्रैफिक के लिए कैडर स्ट्रेंथ की तो वो 230 जवानों की है पर ट्रैफिक विंग में तैनात सिर्फ 170 जवान ही है। या यूं कहे कि 60 पद खाली हैं। 170 जवान दो शिफ्टों में तैनात रहते हैं। पहले जहां ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए 25 दोपहिया वाहन थे अब 16 ही दोपहिया वाहन रह गए है। ये भी दो शिफ्टों में सेवाएं दे रहे हैं। यानि एक शिफ्ट में केवल 8 ही बाइकर्स तैनात रहते हैं। जवानों की कमी के कारण कई प्वाइंट ऐसे हैं जहां पर जवान ही तैनात नहीं होते। ऐसे में रोज शहर में ट्रैफिक जाम लग रहा है।

शिमला शहर में देश व विदेश से पर्यटक घूमने आते हैं। आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से पर्यटक परेशान होते हैं। जिससे शिमला की पर्यटन स्थल के रूप में जो छवि है वह भी खराब हो रही है। बता दे कि राजधानी शिमला में लगने वाले ट्रैफिक जाम से हर कोई परेशान है। पुलिस जवानों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी शहर में रोजाना जाम लगा रहता है। शिमला शहर में जाम से निजात दिलाने के लिए सड़कों को भी चौड़ा किया गया। कई स्थान ऐसे हैं जहां पर जाम अभी भी लग रहा है।

पुलिस ने तैनात किए वॉलेंटियर

शिमला पुलिस ने शहर में ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी व्यवस्था को अपनाया है। पुलिस ने ट्रैफिक वॉलेंटियर तैनात किए हैं। ये वॉलेंटियर पुलिस की ट्रैफिक कंट्रोल में मदद करते हैं। इनमें ज्यादातर वालंटियर कालेज के छात्र हैं। एक महीना सेवाएं देने पर वालंटियर को 100 रुपए रोजाना के आधार पर मानदेय और अनुभव प्रमाणपत्र पुलिस देती है।

वीकैंड पर शहर में 5 से 6 हजार वाहन करते हैं प्रवेश

शिमला में रोजाना 3 से 35 हजार वाहन पहुंचते हैं। वीकैंड पर शहर में 5 से 6 हजार वाहन प्रवेश करते हैं। पर्यटन सीजन में वाहनों की संख्या 10 हजार तक पहुंच जाती है। इसके चलते शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। विक्ट्री टनल, ताराहॉल, स्नोव्यू, विधानसभा चौक के पास दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। विधानसभा चौक से विक्ट्री टनल तक सबसे ज्यादा जाम लगता है। वाहनों की बाइफरकेशन यहां होती है जिसके चलते एक तरफ का ट्रैफिक रोकना पड़ता है। इससे ज्यादा जाम लगता है।

शहर के विधायक के समक्ष भी उठाया स्टाफ की कमी का मुद्दा

शिमला शहर के विधायक हरीश जनार था ने हाल ही में पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ शहर में ट्रैफिक समस्या से निजात के लिए बैठक की। बैठक में उन्होंने पूछा कि जाम के क्या कारण है और कैसे इससे निजात दिलाई जा सकती है। अधिकारियों ने बैठक में कहा कि स्टाफ की कमी है। विधायक हरीश जनारथा ने आश्वासन दिया कि इस मसले को सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।