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जम्मू-कश्मीर में परिवर्तित PDS से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई, राशन वितरण में लीकेज को रोका गया

July 25, 2023

जम्मू-कश्मीर में परिवर्तित PDS से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई, राशन वितरण में लीकेज को रोका गया

जम्मू: पिछले 4 वर्षों से जम्मू और कश्मीर ने अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। नवीन सुधारों और प्रौद्योगिकी-संचालित पहलों की श्रृंखला के माध्यम से सरकार ने सफलतापूर्वक लीकेज को समाप्त किया है, दक्षता बढ़ाई है और यह सुनिश्चित किया है कि पीडीएस के लाभ योग्य लाभार्थियों तक पहुंचे। पीडीएस लाभार्थी रिकॉर्ड के साथ आधारकार्ड को जोड़ने का सरकार का निर्णय पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिसाव को रोकने में एक गेम-चेंजर रहा है। लाभार्थियों की आधार जानकारी को उनके राशन कार्डां से जोड़ने से प्रणाली मूर्खतापूर्ण हो गई है, जिससे नकल की संभावना समाप्त हो गई है और यह सुनिश्चित हो गया है कि केवल पात्र व्यक्तियों को ही लाभ मिले।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के सफल कार्यान्वयन ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एनएफएसए के तहत 100 प्रतिशत राशन कार्ड स्तर हासिल करके, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी पात्र परिवार पीडीएस के दायरे से बाहर न रहे। वितरण प्रक्रि या को सुव्यविस्थत करने और अधिक जवाबदेही लाने के लिए प्रशासन ने 6,735 पॉइंट-आफ-सैल (पीओएस) मशीनों में से 6,413 को आनलाइन स्थिति में बदल दिया। इसके अतिरिक्त मुख्य रूप से सीमति इंटरनैट कनैक्टिविटी वाले क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 322 पीओएस मशीनों को आफलाइन मोड में रखा गया था। इस तकनीक-संचालित दृष्टिकोण ने न केवल वितरण प्रक्रिया को तेज कर दिया है बल्किकदाचार की गुंजाइश भी कम कर दी है और वास्तविक समय पर निगरानी सुनिश्चित की है।

93 प्रतिशत से अधिक पीडीएस लेनदेन आनलाइन होने के कारण लाभार्थी अब आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से अपना राशन प्राप्त करते हैं। वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनआरसी) को लागू करके, सरकार ने निर्बाध पोर्टेबिलिटी की सुविधा प्रदान की है, जिससे लाभार्थी देश भर में किसी भी पीडीएस आउटलेट से अपने हक का राशन प्राप्त कर सकते हैं। इससे अस्थायी आबादी को काफी मदद मिली है और इससे खाद्य सुरक्षा नेटवर्क और मजबूत हुआ है। सरकार की सावधानीपूर्वक डी-डुप्लीकेशन प्रक्रि या के कारण पीडीएस प्रणाली से दस लाख अयोग्य लाभार्थियों को हटा दिया गया। सुव्यवस्थित पीडीएस ने 230 करोड़ रु पए से अधिक की बचत की है और जरूरतमंद आबादी को 1.6 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न कुशलतापूर्वक वितरित किया है। संशोधित पीडीएस प्रणाली इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे सुशासन समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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