नेशनल डेस्क : सोशल मीडिया पर आए दिन अजीबो-गरीब खबरें सामने आती हैं, और इस बार एक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, आयकर विभाग ने दो लोगों को करोड़ों रुपये का नोटिस भेजा है। यह मामला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि इनमें से एक तो जूस बेचने वाला है और दूसरा अंडा बेचने वाला है। आइए जानते हैं इस खबर को विस्तार से।
Income Tax का नोटिस और दोनों का हैरान होना
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दो ऐसे छोटे कारोबारी जिनके पास व्यवसाय तो छोटा सा है, लेकिन आयकर विभाग ने उन्हें करोड़ों रुपये का बकाया नोटिस भेजा है। हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों सेलर इस नोटिस के कारण पूरी तरह से अज्ञात हैं। उन्हें नहीं समझ में आ रहा कि यह नोटिस क्यों भेजा गया और बकाया कैसे लगाया गया। इन दोनों में से एक प्रिंस सुमन है जो दमोह (मध्य प्रदेश) का रहने वाला है और दूसरा मोहम्मद रहीस है जो अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में जूस बेचता है। दोनों के जीवन में आयकर विभाग का नोटिस एक बड़े उलटफेर की तरह आया है।
अंडे बेचने वाले को भेजा 6 करोड़ रुपये का नोटिस
मध्य प्रदेश के दमोह निवासी प्रिंस सुमन को आयकर विभाग ने 6 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया नोटिस भेजा है। ये नोटिस उन्हें 50 करोड़ रुपये के कारोबार से जुड़े लेन-देन के लिए भेजा गया है। प्रिंस सुमन की एक कंपनी है जिसका नाम प्रिंस एंटरप्राइजेज है। यह कंपनी लकड़ी, चमड़ा और लोहे का व्यापार करती है। कंपनी का रजिस्ट्रेशन 2022 में दिल्ली के स्टेट जोन 3 के वार्ड 33 में हुआ था। आयकर विभाग का कहना है कि इस कंपनी ने पिछले दो सालों में बड़े पैमाने पर लेन-देन किया है। अब विभाग ने प्रिंस से 50 करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स भी मांगे हैं। प्रिंस को यह भी नहीं समझ आ रहा है कि उनका नाम इस कारोबारी गतिविधि में कैसे जुड़ा और किस आधार पर इतनी बड़ी रकम का बकाया लगाया गया।
जूस बेचने वाले को भेजा 7.79 करोड़ रुपये का नोटिस
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जूस बेचने वाले मोहम्मद रहीस को भी आयकर विभाग ने 7.79 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया नोटिस भेजा है। रहीस को यह नोटिस मिलने के बाद उनका पूरा परिवार परेशान हो गया है।रहीस ने बताया कि उन्होंने कभी भी इतनी बड़ी रकम को देखा तक नहीं है। उनके पास इस नोटिस का कोई जवाब नहीं है। रहीस ने आयकर विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने निजी दस्तावेज किसी को दिए थे। रहीस ने इस सवाल का साफ तौर पर नकारात्मक जवाब दिया, यानी उन्होंने किसी को अपना दस्तावेज नहीं दिया था। यह नोटिस उनके लिए बहुत ही चौंकाने वाला था, क्योंकि उनका कारोबार केवल जूस बेचना है और वह कभी इतने बड़े लेन-देन में शामिल नहीं रहे।
यह नोटिस क्यों भेजा गया?
यह दोनों मामले इस बात को उजागर करते हैं कि आयकर विभाग की जांच में कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आ रही हैं। हालांकि, दोनों कारोबारियों को नोटिस क्यों भेजा गया, इसका साफ कारण अभी तक नहीं पता चला है। हो सकता है कि इन दोनों के दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी हुई हो या फिर किसी और ने इनके नाम पर फर्जी कारोबार किया हो। विभाग ने जो लेन-देन बताया है, वह दोनों कारोबारियों के छोटे व्यवसायों से मेल नहीं खाता, जिससे यह भी संभावना जताई जा रही है कि उनके नाम पर बड़ा घोटाला हो सकता है।
यह दोनों मामले इस बात को स्पष्ट करते हैं कि कभी भी किसी व्यक्ति के साथ कुछ भी हो सकता है, चाहे वह कितना भी छोटा व्यवसायी क्यों न हो। इस मामले में दोनों व्यापारियों को आयकर विभाग के नोटिस ने चौंका दिया है, और अब यह जांच का विषय है कि उनके नाम पर इतनी बड़ी रकम का बकाया क्यों लगाया गया। आगे आने वाले समय में यह साफ होगा कि इनके नाम पर हुए लेन-देन की असलियत क्या है, और क्या इन दोनों को गलतफहमी में फंसाया गया है या फिर कुछ और ही मामला है।