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वैश्विक अनिश्चितता पर जयशंकर ने जताई चिंता, कहा- आर्थिक गतिविधियां बन रहीं ‘हथियार’

April 11, 2025

वैश्विक अनिश्चितता पर जयशंकर ने जताई चिंता, कहा- आर्थिक गतिविधियां बन रहीं ‘हथियार’
नेशनल डेस्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता, खासकर आर्थिक गतिविधियों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने तथा विनिर्माण के अत्यधिक केंद्रीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि लचीली और भरोसेमंद साझेदारी बनाई जा सके जो देश के आíथक हितों के साथ-साथ इसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं के लिए आवश्यक है। विदेश मंत्री ने ‘इंडिया-इटली बिजनेस, साइंस एंड टेक्नोलॉजी फोरम’ में यह टिप्पणी की। इसमें इतालवी उपप्रधानमंत्री एंटोनियो तजानी ने भी हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा, ‘‘आज हम एक जानी पहचानी वैश्विक राजनीतिक और आíथक व्यवस्था में मिल रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था बदल रही है, अधिक जटिल और अप्रत्याशित होती जा रही है।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘भले ही हम महामारी, यूरोप, पश्चिम एशिया और एशिया में कई संघर्षों से उबर रहे हों, हमें यह पहचानना होगा कि हमारी आपूर्ति श्रृंखलाएं अधिक नाजुक हो गई हैं और हमारा समुद्री नौवहन अधिक बाधित हो गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है क्योंकि बाजार हिस्सेदारी का लाभ उठाया जा रहा है और आर्थिक गतिविधियों को हथियार बनाया जा रहा है। वास्तव में, विनिर्माण का अत्यधिक केंद्रीकरण और आपूíत श्रृंखलाओं की विश्वसनीयता आज प्रमुख चिंता बन गई है।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि उद्योग और सरकारें तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण और तकनीकी बदलावों के प्रभाव से तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, जो व्यापार बाधाओं और निर्यात नियंत्रण के कारण और भी बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया भर के देश मजबूत राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी बनाकर, अपने विनिर्माण और व्यापार भागीदारों में विविधता लाकर तथा नवाचार एवं अनुसंधान में निवेश करके जोखिम कम कर रहे हैं।’’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हम दोनों ही अपने अपने देश (भारत और इटली) में इन प्रवृत्तियों को देख रहे हैं।’’ जयशंकर ने कहा कि भारत हाल के वर्षों में ऐसी लचीली और भरोसेमंद साझेदारी बनाने के लिए समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए इस सूची में इटली का स्थान सबसे ऊपर है। कई क्षेत्रों में एक स्वाभाविक पूरकता है जिसका हमें दोहन करने की आवश्यकता है।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘चाहे वह ऊर्जा हो या परिवहन, खाद्य प्रसंस्करण हो या हल्की इंजीनियरिंग, आपके पास ऐसी तकनीकें और सवरेत्तम प्रथाएं हैं जो इस तरह के सहयोग को सार्थक बनाती हैं।’’ उन्होंने प्रस्तावित भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आíथक गलियारे (आईएमईईसी) का भी उल्लेख किया। विदेश मंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल अर्थव्यवस्थाओं, ऊर्जा संसाधनों और संचार के लिए वास्तव में एक नयी वैश्विक धुरी बनाएगी।

आईएमईईसी पहल को 2023 में दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। अग्रणी पहल के रूप में प्रस्तुत आईएमईईसी में सऊदी अरब, भारत, अमेरिका और यूरोप के बीच एक विशाल सड़क, रेलमार्ग और नौवहन नेटवर्क की परिकल्पना की गई है, जिसका उद्देशय़ एशिया, पश्चिम एशिया और पश्चिमी देशों को जोड़ना है।

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