चंडीगढ़ : पंजाब सरकार द्वारा नशा खत्म करने के लिए मुहिम चलाई गई है। इस मुहिम के दौरान मैडिकल नशे पर भी नकेल कसी जा रही है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा अमृतसर में चल रहे नशीली दवाइयों की तस्करी के एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है। यह मॉड्यूल पत्रकारिता की आड़ में चलाया जा रहा था। एक निजी वैब चैनल का मालिक अपने भाई और शहर के डॉक्टर के साथ मिलकर पूरा नैटवर्क चला रहा था। यह नैटवर्क हिमाचल, हरियाणा और पंजाब में फैला हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अमृतसर के ज्वाला एस्टेट में रहने वाले अमित भंडारी को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से नशीली गोलियों का जखीरा बरामद किया गया है। 31,700 ट्रामाडोल गोलियां बरामद की गई हैं।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा की गई जांच में कई डॉक्टरों के नाम भी सामने आ रहे हैं। यह नैटवर्क काफी देर से चल रहा था। पुलिस इस नैटवर्क पर हाथ डालने से कतरा रही थी। इस केस में शामिल लोगों के संबंध चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक के नेताओं और अधिकारियों के साथ हैं। इसलिए केंद्रीय एजैंसी द्वारा कार्रवाई की गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम को सूचना मिली थी हिमाचल प्रदेश के जिला बद्दी और हरियाणा के जिला करनाल से ट्रामाडोल की गोलियां तैयार करवाई जा रही हैं। अमृतसर की बलास्टिक फार्मा नाम की फर्म द्वारा इन गोलियों पर अपनी मनमर्जी का रेट प्रिंट करवाया जा रहा है। इसके बाद अमृतसर से ट्रामाडोल की गोलियों को अमृतसर के अलावा पंजाब के कई निजी बड़े अस्पतालों को सप्लाई किया जा रहा है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जब अपनी जांच शुरू की गई तो पता चला के डी फॉर यू के नाम पर निजी चैनल चलाने वाला दीपक भंडारी अपने भाई अमित भंडारी और मैडिकल लाइन के कुछ लोगों के साथ मिलकर पूरा नैटवर्क चला रहा है। 2 दिन पहले नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने दीपक भंडारी के घर में छापामारी की और पूरा रिकॉर्ड जब्त कर लिया। 2 दिन की जांच में पाया गया कि ट्रामाडोल गोलियों का गोरखधंधा चल रहा है। रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर हेराफेरी पाई गई है, इसके बाद कानूनी कार्रवाई की गई है।
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