नेशनल डेस्क: कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश विदेश भेजने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाने पर तंज कसा है। उन्होंने बिना नाम लिए शशि थरूर पर हमला करते हुए कहा कि “कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना” दो अलग-अलग बातें हैं। जयराम रमेश ने इसे समझाने के लिए उदाहरण दिया कि कांग्रेस एक विशाल गंगा जैसी है, जिसकी कई सहायक नदियां हैं, लेकिन इनमें से कुछ सूख जाती हैं और कुछ प्रदूषित हो जाती हैं।
शशि थरूर के नाम पर गरमाई सियासत
केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत का संदेश लेकर विदेश जाने के लिए सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाए हैं। इनमें से एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शशि थरूर को सौंपा गया है, जिसके बाद राजनीति गरमा गई है। दरअसल, कांग्रेस ने जिन चार नामों का प्रस्ताव भेजा था, उसमें शशि थरूर का नाम नहीं था। लेकिन केंद्र सरकार ने अपनी ओर से शशि थरूर का नाम प्रस्तावित किया है, जिससे यह सियासी विवाद का विषय बन गया है।
कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना दोनों में बहुत फर्क
इस पर जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना दोनों में बहुत फर्क है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अपने मन से किसी भी सांसद को प्रतिनिधिमंडल में नहीं शामिल कर सकती, और यह लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी सांसद का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने से पहले उसे अपनी पार्टी से अनुमति लेनी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि जब सरकार ने कांग्रेस से चार नाम मांगे थे, तो कांग्रेस ने वही नाम भेजे थे। पार्टी की ओर से किसी नाम में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अब यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसे प्रतिनिधिमंडल में शामिल करती है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की बातचीत में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।
शशि थरूर की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह भारत सरकार के निमंत्रण से सम्मानित महसूस कर रहे हैं। थरूर ने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “मैं हाल की घटनाओं पर हमारे देश का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए भारत सरकार के निमंत्रण से सम्मानित महसूस कर रहा हूं। जब राष्ट्रीय हित की बात होगी और मेरी सेवाओं की आवश्यकता होगी, तो मैं पीछे नहीं रहूंगा। जय हिंद!”
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