नेशनल डेस्क: ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारत के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल रूस गया था, लेकिन इस यात्रा के दौरान एक असामान्य घटना घटी। इस प्रतिनिधिमंडल को ले जाने वाला विमान मॉस्को एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक की चपेट में आने से बाल-बाल बचा। यह विमान डीएमके सांसद कनिमोझी को लेकर जा रहा था।
एयरपोर्ट पर मची अफरातफरी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन द्वारा मॉस्को एयरपोर्ट पर किए गए ड्रोन हमले के कारण एयरपोर्ट पर अफरातफरी मच गई और कई घंटे तक विमानों की लैंडिंग को रोका गया। विमान को सुरक्षा कारणों से काफी देर तक हवा में चक्कर लगाना पड़ा। अंततः काफी देर के बाद विमान को मॉस्को एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की अनुमति मिली। भारत का यह प्रतिनिधिमंडल ऑपरेशन सिंदूर पर दुनियाभर में भारत के रुख को स्पष्ट करने के लिए विभिन्न देशों में भेजा गया है। रूस भेजे गए इस प्रतिनिधिमंडल में डीएमके सांसद कनिमोझी, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय, आरजेडी सांसद प्रेमचंद गुप्ता, कैप्टन ब्रिजेश, अशोक कुमार मित्तल और राजदूत मंजीव सिंह पूरी शामिल थे।
On arrival at Moscow’s Domodedovo Airport the Hon’ble Members of Parliament @KanimozhiDMK , @RajeevRai , @CaptBrijesh , @guptapc50 , @DrAshokKMittal and Ambassador @ambmanjeevpuri , welcomed by Ambassador @vkumar1969 . A busy schedule of meetings and interactions awaits them in… pic.twitter.com/p5fStqNYnh
— India in Russia (@IndEmbMoscow) May 22, 2025
22 मई को रूस के लिए रवाना हुए इस प्रतिनिधिमंडल को मॉस्को एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के कारण एक बड़ी देरी का सामना करना पड़ा। इसके बाद, एयरपोर्ट पर सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को कुछ घंटों के लिए निलंबित कर दिया गया। इन घटनाओं के बाद, भारतीय सांसदों का विमान लैंडिंग के लिए निर्धारित समय से कई घंटे बाद उतरा। हालांकि, विमान की देरी के बावजूद, सभी सांसद सुरक्षित रूप से मॉस्को एयरपोर्ट पर उतरे। इसके बाद, रूस में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें उनके होटल तक सुरक्षित पहुंचाया।
आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देने का समय
डीएमके सांसद कनिमोझी ने मॉस्को पहुंचने के बाद कहा, “रूस हमारे लिए एक रणनीतिक साझीदार है। हम हमेशा मिलकर कूटनीतिक मुद्दों, व्यापार और अन्य मामलों पर काम करते आए हैं। जब भारत को बार-बार आतंकवादी हमलों का सामना करना पड़ रहा है, तो रूस से संपर्क करना और वहां अपनी स्थिति को स्पष्ट करना बहुत जरूरी हो जाता है। हाल ही में, भारत में हमने 26 नागरिकों को खो दिया। इसलिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री ने यह निर्णय लिया कि विभिन्न दलों के सांसदों को दुनिया के सामने भारत का आतंकवाद के खिलाफ रुख और हमारी स्थिति प्रस्तुत करने के लिए भेजा जाए।”
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