चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की सामाजिक-आर्थिक मानदंड के तहत अंक देने की अधिसूचनाएं रद्द करने के कारण हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की तरफ से की गई चयन सूचियां संशोधित करनी पड़ेंगी। कांग्रेस के महासचिव और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शनिवार को यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पहले से नियुक्त जो कर्मचारी संशोधित सूची से बाहर होंगे, उनके लिए हरियाणा सरकार नए पद सृजित करे ताकि नियमित पदों पर उनकी नौकरी बरकरार रह सके। सुरजेवाला ने कहा कि चूंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ये अंक देने का प्रावधान किया मगर उन्हें संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 की जानकारी होनी चाहिए थी कि यह प्रावधान इन अनुच्छेदों का उल्लंघन है।
इसलिए हरियाणा की भाजपा सरकार की गलती के कारण लगभग 30000 पक्के कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। उन्होंने कहा कि मनोहर लाल और नायब सैनी सरकारों ने हरियाणा के युवाओं के भविष्य की ‘भ्रूण हत्या’ कर दी है। उन्होंने कहा कि ‘न पर्ची – न खर्ची’ का षडयंत्रकारी व झूठा नारा देकर तथा ‘मेरिट पर नौकरी लगाने की डींगें भरकर’ भाजपा ने बड़ी-बड़ी बातें कीं और वोट बटोरे। सुरजेवाला ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में साफ लिखा है कि जो पहले से नियुक्त कर्मचारी अगर संशोधित मेरिट सूची में नहीं आएंगे तो सरकार उनके लिए पद ढूंढे और जब तक पद नहीं मिलते तो वे तदर्थ आधार पर नौकरी करेंगे। सुरजेवाला ने कहा कि इससे उनकी पुरानी नौकरी का कोई लाभ नहीं मिल पाएगा, न पेंशन मिलेगी और न वेतन। इसलिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तुरंत घोषणा करे कि मेरिट सूची से बाहर होने वाले नियुक्त कर्मचारियों के लिए नए पद सृजित किए जाएंगे।
ये भी पढ़ें- OTT पर छाई ‘पीकी ब्लाइंडर्स: द इमॉर्टल मैन’, 50 देशों में कर रही ट्रेंड
मेष: दिन शुभ रहेगा...