Last Updated: October 3, 2026

Dainik Savera Times Logo

तिब्बत का चीन में शामिल होना एक क्रमिक ऐतिहासिक प्रक्रिया है

May 26, 2025

तिब्बत का चीन में शामिल होना एक क्रमिक ऐतिहासिक प्रक्रिया है

कुछ पश्चिमी विद्वान हमेशा गलती से मानते रहते हैं कि तथाकथित चीन केवल हान जातीय लोगों का देश है, अर्थात चीन के हान, तांग और सोंग राजवंशों आदि के द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाने वाला देश है, जबकि गैर-हान लोगों द्वारा शासित राजवंश चीन नहीं हैं। पर यह एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण है जो तथ्यों के अनुरूप नहीं है। वास्तव में, चीन यह अवधारणा इतिहास में धीरे-धीरे बनी हुई है। चीन अनेक जातीय समूहों से बना देश है। तिब्बती, मंगोल, मंचू, उइगर और अन्य जातीय समूह इतिहास में अलग-अलग समय पर धीरे-धीरे बड़े चीनी परिवार में शामिल हुए हैं, और साथ मिलकर उन्होंने चीनी राष्ट्र का समुदाय बनाया है।

प्राचीन काल से ही तिब्बती लोगों की विभिन्न शाखाएं तिब्बती पठार में रहती थीं। ऐतिहासिक रूप से, टुबो (यानी आज के तिब्बत अर्थात् शीत्सांग) शासन का चीनी मध्य मैदानों के विभिन्न राजवंशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रहा था। बेशक, उनके बीच संघर्ष और युद्ध भी अपरिहार्य थे। 7वीं शताब्दी की शुरुआत में सोंगत्सेन गम्पो ने तिब्बती पठार पर विभिन्न जातीय समूहों को एकीकृत किया था और टुबो राजवंश की स्थापना की थी। 640 ई. में, सोंगत्सेन गम्पो के विशेष दूत लू डोंगज़ान ने सोने के खजाने को लेकर तांग राजवंश की राजधानी चांगआन तक पहुंचा और तांग के सम्राट ताइज़ोंग से मुलाकात की। इस घटना को दरबारी चित्रकारों द्वारा चित्रों में भी दर्ज किया गया। तांग ताइज़ोंग ने सोंगत्सेन गम्पो के अनुरोध को स्वीकार कर शाही परिवार की बेटी राजकुमारी वेनचेंग का विवाह तिब्बती राजा से करने पर सहमत किया। अगले वर्ष, राजकुमारी वेनचेंग के नेतृत्व वाले विशाल दल टुबो की राजधानी जा पहुंचे। उन्हों ने हान जातीय क्षेत्रों के साहित्य, संगीत, रेशम, शराब व कागज बनाने और कृषि कौशल आदि को टुबो में लाया। तांग राजवंश और टुबो के बीच महान राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शुरू हुआ, तथा हान और तिब्बती लोगों के बीच जातीय एकीकरण घनिष्ठ हो गया।

राजकुमारी वेनचेंग टुबो में बड़ी संख्या में सांस्कृतिक और वैज्ञानिक प्रतिभाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक ग्रंथ भी लेकर आईं। वे अपने साथ संस्कृति, भोजन, कढ़ाई, चिकित्सा और बौद्ध पुस्तकें जैसे विभिन्न कौशल भी लेकर आये। सोंगत्सेन गम्पो ने राजकुमारी वेनचेंग के आवास के लिए भव्य पोताला पैलेस का निर्माण कराया। इस विवाह ने न केवल तांग राजवंश और टुबो के बीच संबंधों को गहरा किया, बल्कि टुबो का इतिहास भी बदल दिया। तब से, टुबो ने कानून बनाने, लेखन बनाने और उत्पादन तकनीक विकसित करने के लिए तांग राजवंश की नकल की, और टुबो कुलीनों के बच्चों को कन्फ्यूशियस ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए हान जातीय राजवंशों में भेजा। बौद्ध धर्मग्रंथों को भी हान जातीय क्षेत्रों से इसी माध्यम से टुबो तक पहुंचाया गया, जिससे बाद में तिब्बती बौद्ध धर्म के जन्म की नींव पड़ी। बाद में, तांग के सम्राट झोंगजोंग ने भी राजमहल में अपनी बेटी, राजकुमारी जिनचेंग, का विवाह तिब्बती राजा त्रिसोंग देत्सेन से कर दिया। राजकुमारी जिनचेंग ने भिक्षुओं को टुबो में प्रवेश करने, मंदिर बनाने और बौद्ध धर्मग्रंथों का अनुवाद करने के लिए वित्त पोषित किया, जिससे तिब्बती बौद्ध धर्म का और अधिक विकास हुआ। तांग राजवंश और टुबो के बीच के रिश्ते को चाचा-भतीजा का रिश्ता बताया जाता था।

इसके बाद के सैकड़ों वर्षों में तिब्बती पठार के विभिन्न भागों में भिन्न भिन्न संप्रदाय और शासन उभरे। 13वीं शताब्दी में, उत्तरी घास के मैदानों से आये मंगोलों ने चीन के मध्य मैदानों में एक नये और विशाल राजवंश, युआन राजवंश की स्थापना की। युआन राजवंश ने पारंपरिक हान जातीय क्षेत्रों तथा तिब्बती पठार सहित विशाल क्षेत्रों को एकीकृत किया और तब से तिब्बत और चीनी केंद्रीय सरकार के बीच अधीनस्थ संबंध औपचारिक रूप से स्थापित हो गया। यह युआन राजवंश के शासक थे, जिन्होंने तिब्बती बौद्ध धर्म के अनेक संप्रदायों में से शाक्य संप्रदाय को टुबो में मंगोल राजवंश के प्रतिनिधि के रूप में चुना था। तब से चीन के केंद्रीय राजवंश और तिब्बती क्षेत्रों की स्थानीय सरकारों के बीच संबंध तेजी से घनिष्ठ होते गए। इसके बाद के छींग राजवंश ने तिब्बत में औपचारिक रूप से एक मंत्री की नियुक्ति की जो तिब्बती सरकारी मामलों का प्रभारी था। सम्राट कियानलांग ने जीवित बुद्ध के पुनर्जन्म का निर्धारण करने के लिए स्वर्ण कलश चित्रण प्रणाली की भी स्थापना की। नये चीन की स्थापना के बाद तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति हुई और 1959 में तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार शुरू हुए। तिब्बती जाति चीनी राष्ट्र के एक सदस्य की स्थिति का अधिक स्पष्टीकरण साबित हुआ।चीन में सभी जातीय समूहों की एकता से संयुक्त रूप से पूरे चीन के सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

ये भी पढ़ें- कमजोर हुआ नक्सलवाद, 10 साल में 10 हजार से ज्यादा माओवादियों ने टेके घुटने

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें