चंडीगढ़: पंजाब में सरकार की नई लैंड पूलिंग नीति के खिलाफ किसान संगठनों का विरोध तेज़ होता जा रहा है। इसी कड़ी में आज राज्य भर में किसान संगठनों द्वारा व्यापक बाइक रैलियों का आयोजन किया गया है। भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) के अध्यक्ष मंजीत एस राय और किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन एस पंधेर ने इस विरोध अभियान की घोषणा कल एक प्रेस वार्ता के दौरान की थी।
पूरे पंजाब में दिखेगी किसान एकजुटता
बाइक रैली का आयोजन प्रदेश के सभी ज़िलों और प्रमुख कस्बों में किया जा रहा है। किसान मोटरसाइकिलों पर तिरंगे और विरोध के बैनर लेकर सड़कों पर उतरेंगे। इस प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना है कि जब तक किसानों की ज़मीन की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
20 अगस्त को जालंधर में महा रैली
किसानों ने 20 अगस्त को जालंधर छावनी के कुक्कड़ गाँव में एक विशाल रैली का ऐलान किया है, जहाँ सरकार ने 1,000 एकड़ ज़मीन अधिग्रहित कर अर्बन एस्टेट फेज़-3 नामक परियोजना शुरू करने की योजना बनाई है। यह रैली विरोध की दिशा तय करने वाली एक निर्णायक घड़ी मानी जा रही है।
क्या है लैंड पूलिंग नीति?
पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति के तहत किसानों से ज़मीन लेकर उसका एक हिस्सा विकसित कर उन्हें लौटाया जाएगा, जबकि बाकी जमीन का इस्तेमाल सरकार या विकास प्राधिकरण अपने अनुसार करेंगे। सरकार का कहना है कि यह नीति शहरी विकास और किसानों के हितों को साथ लेकर चलने के लिए तैयार की गई है। मगर किसान संगठनों का तर्क है कि इससे उनकी जमीन पर सीधा नियंत्रण खत्म हो जाएगा और उन्हें लंबे समय तक मुआवज़ा या ज़मीन वापसी का इंतजार करना पड़ेगा।
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