नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक कमेटी बनाई और भारत में ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की सुरक्षा पक्का करने के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी कीं।
जस्टिस जे बी पारदीवाला की बेंच के फैसले में कहा गया है कि यह कमेटी, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस आशा मेनन हेड करेंगी, जेंडर नॉन-कन्फर्मिंग और जेंडर-डायवर्स लोगों के लिए समान मौके, सबको साथ लेकर चलने वाली मेडिकल केयर और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर गौर करेगी।
कमेटी में ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट ग्रेस बानू, अकाई पद्मशाली, CLPR बेंगलुरु के मेंबर गौरव मंडल और एसोसिएशन फॉर ट्रांसजेंडर हेल्थ इन इंडिया के डॉ. संजय शर्मा शामिल होंगे।
इस मामले में कोर्ट की मदद के लिए टॉप कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट जयना कोठारी को एमिकस क्यूरी अपॉइंट किया है।
कोर्ट ने ट्रांसजेंडर लोगों की सुरक्षा और उन्हें शामिल करने के लिए कुछ गाइडलाइंस भी बनाई हैं, और कहा है कि जब तक केंद्र सरकार एक पूरी नेशनल पॉलिसी नहीं बना लेती, तब तक सभी इंस्टीट्यूशन जिनकी अपनी पॉलिसी नहीं हैं, उन्हें इन गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए।
जस्टिस पारदीवाला ने फैसला सुनाते हुए कहा, “इससे ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की रक्षा में बहुत मदद मिलेगी। हमें उम्मीद है कि इस फैसले से थर्ड जेंडर का भविष्य सुरक्षित होगा।”
टॉप कोर्ट का यह फैसला एक ट्रांसजेंडर महिला की अर्जी पर आया, जिसमें उसने अपने टर्मिनेशन से हुए नुकसान के लिए अर्जी दी थी। टॉप कोर्ट ने यह भी कहा कि उसने इस बात को गंभीरता से लिया है कि जिस तरह से दो प्राइवेट स्कूलों ने याचिकाकर्ता को टर्मिनेट किया था।
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