करनाल।
अमेरिका के पोर्टलैंड वाशिंगटन बॉर्डर के पास 17 अक्तूबर को हथलाना गांव के प्रदीप (35) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 27 दिन बाद बुधवार को उनका शव गांव पहुंचा तो हर आंख नम हो गई। करीब 40 लाख रुपये का कर्ज लेकर डेढ़ साल पहले विदेश गए प्रदीप के परिवार की आर्थिक हालत खराब है। वहीं, वहां रह रहे भारतीय युवाओं ने चार लाख रुपये खर्च कर शव को भारत भिजवाया। परिजनों ने गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया।
प्रदीप दो सगी और चार चचेरी बहनों के इकलौते भाई थे। 16 अक्तूबर की रात उन्होंने परिवार से आखिरी बार बात की थी। उन्होंने अगले साल दिवाली पर घर लौटने का वादा किया था, लेकिन इस बार उसी दिन मौत की खबर आई। पत्नी रोमी ने बताया कि प्रदीप करीब डेढ़ साल पहले अमेरिका गए थे। शादी को दस साल हो चुके थे, पर दंपति की कोई संतान नहीं थी।
10 सेकंड में हुई वारदात, आरोपी ने खुद को भी मारी गोली
वारदात की सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि 17 अक्तूबर को शाम 5:19 बजे एक सेवानिवृत्त अमेरिकी फौजी स्टोर में घुसा और काउंटर पर खड़े प्रदीप को गोली मार दी। 10 सेकंड बाद उसने खुद की कनपटी पर भी गोली मार ली। पूरी वारदात महज ढाई मिनट में खत्म हो गई। फिलहाल फायरिंग की वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
आठ महीने की मुश्किल यात्रा के बाद पहुंचे थे अमेरिका
पत्नी रोमी ने बताया कि प्रदीप परिवार की हालत सुधारने के लिए विदेश गए थे। वह डंकी रूट से गए थे, जहां पहुंचने में उन्हें आठ महीने लगे। वहां एक स्टोर पर काम शुरू किया था और कुछ दिन पहले ही घर फोन कर बताया था कि सब ठीक है और जल्द कर्ज चुका देंगे। लेकिन किस्मत ने साथ छोड़ दिया।
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