नई दिल्ली : बदलती जीवनशैली और तनाव भरी जिंदगी बीमारियों का कारण बन रही है। कम उम्र में ही स्किन और बालों से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं। आज बच्चों से लेकर युवाओं में जल्दी बाल सफेद होने की परेशानी देखी जा रही है। बाल सफेद होना सिर्फ खराब लाइफस्टाइल का कारण नहीं है, बल्कि ये पोषण की कमी, तनाव और लापरवाही का संकेत देता है। आयुर्वेद में बाल सफेद होने की परेशानी को वात दोष, रक्त धातु, हॉर्मोन के असंतुलन और रस धातु से जोड़कर देखा गया है। आयुर्वेद में सफेद बालों की परेशानी को कम करने के लिए कई जड़ी-बूटियों को लाभकारी बताया है। इसमें आंवला, ब्रrी, जटामांसी, करी पत्ता, भृंगराज, गुड़हल, मुलेठी और नीम का पाउडर शामिल है।
डॉक्टरी परामर्श के साथ अगर इन जड़ी-बूटियों का सेवन किया जाए, तो सफेद बाल होने की परेशानी को रोका जा सकता है। ये सभी जड़ी बूटियां बालों की जड़ों को पोषित करती हैं और प्राकृतिक तरीके से उन्हें रंग भी देती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाल तब सफेद होना शुरू होते हैं जब शरीर में मेलानिन प्रभावित होता है। यह स्किन और बाल दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके अलावा, विटामिन बी12, आयरन की कमी, नींद आने में परेशानी होना, तनाव लेना, सिर दर्द की परेशानी लगातार होना और आंखों की रोशनी कम होना भी बालों के सफेद होने का कारण होते हैं।
बालों को सही पोषण देने के लिए घर पर आसानी से पोषक तत्वों से भरपूर तेल भी बना सकते हैं, जिसे पोटली तेल कहा जाता है। इसमें अपने पसंदीदा तेल में करी पत्ता, भृंगराज, गुड़हल, नीम, मेथी दाना और आंवला को सूती पोटली में बांधकर तेल में तब तक उबालें जब तक उसका रंग गहरा न हो जाए। तेल को छानकर इस्तेमाल करें और हफ्ते में दो बार लगाएं। इससे बालों को मजबूती मिलेगी।
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