नेशनल डेस्कः संसद के शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। गुरुवार को बीजेपी ने एक तृणमूल कांग्रेस सांसद पर लोकसभा परिसर के अंदर ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया। इस लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने तृणमूल सदस्य का नाम लिए बिना यह मुद्दा उठाया और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से इस उल्लंघन पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह सदन को पता होना चाहिए कि देश में ई-सिगरेट बैन हैं। मैं लोकसभा स्पीकर से पूछना चाहता हूं कि क्या उन्होंने सदन में ई-सिगरेट पीने की इजाज़त दी है। एक TMC सांसद कई दिनों से लोकसभा के अंदर ई-सिगरेट पी रहे हैं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कड़े शब्दों में जवाब दिया कि ऐसा कोई नियम या परंपरा नहीं है जो किसी भी सांसद को सदन के अंदर धूम्रपान करने की इजाज़त दे। बिरला ने कहा, “अगर ऐसी कोई घटना मेरे संज्ञान में स्पष्ट रूप से लाई जाती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।”
ई-सिगरेट क्या हैं?
ई-सिगरेट इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं जो एक लिक्विड को गर्म करके एक एरोसोल बनाते हैं जिसे यूजर सांस से अंदर लेते हैं। इस लिक्विड में आमतौर पर निकोटीन, फ्लेवरिंग एजेंट और दूसरे केमिकल होते हैं। पारंपरिक सिगरेट के उलट, ई-सिगरेट तंबाकू नहीं जलाती हैं, लेकिन वे फिर भी निकोटीन देती हैं, जो नशे की लत लगाता है, और यूज़र्स को हानिकारक पदार्थों के संपर्क में लाता है। इन्हें अक्सर धूम्रपान के सुरक्षित विकल्प के तौर पर बेचा जाता है, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इनसे काफी जोखिम होता है, खासकर युवाओं के लिए।
भारत में ई-सिगरेट, वेप पर बैन
भारत में किशोरों और युवा वयस्कों के बीच ई-सिगरेट के इस्तेमाल में तेजी से बढ़ोतरी को लेकर चिंताएं बढ़ीं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने तर्क दिया कि ये डिवाइस निकोटीन पर निर्भर यूजर्स की एक नई पीढ़ी बना सकते हैं और तंबाकू की खपत कम करने के प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं। रिपोर्टों में ई-सिगरेट से निकलने वाले धुएं में हानिकारक केमिकल की मौजूदगी और उनके स्वास्थ्य प्रभावों पर लंबे समय तक रिसर्च की कमी पर भी प्रकाश डाला गया।
सितंबर 2019 में, भारत ने ई-सिगरेट पर देशव्यापी बैन लगा दिया। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम ने ई-सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण और विज्ञापन को अवैध बना दिया। कब्ज़े और इस्तेमाल को भी हतोत्साहित किया गया, हालांकि व्यक्तिगत इस्तेमाल को व्यापार और वितरण की तरह ही अपराध नहीं माना गया। सरकार ने कहा कि यह बैन सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक निवारक उपाय था।
कानून के तहत जो कोई भी इन्हें बेचते या वितरित करते हुए पाया जाएगा, उसे जुर्माना और जेल हो सकती है। अधिकारियों ने डिवाइस जब्त करने और ऑनलाइन बिक्री रोकने के लिए कई अभियान चलाए हैं। बैन के बावजूद, देश के कुछ हिस्सों में अवैध व्यापार जारी है, जिसके कारण स्वास्थ्य अधिकारियों को ई-सिगरेट के इस्तेमाल से जुड़े खतरों के बारे में बार-बार चेतावनी देनी पड़ी है।