वैज्ञानिकों की एक टीम ने पता लगाया है कि क्रोनिक किडनी डिजीज और हार्ट फेलियर में इस्तेमाल होने वाली दवा, समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी (Premature Ovarian Insufficiency) के इलाज में भी असरदार हो सकती है।
जापान की जुंटेंडो यूनिवर्सिटी और हांगकांग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की यह खोज मंगलवार को अमेरिकी जर्नल साइंस के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण में प्रकाशित हुई। टीम का मानना है कि इससे इन्फर्टिलिटी के इलाज में एक नई और प्रभावी थेरेपी आ सकती है। जुंटेंडो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर काज़ुहिरो कवामुरा ने द जापान टाइम्स* को बताया, “हम ओवरी स्टिमुलेशन को ऑप्टिमाइज करना चाहते हैं और ज्यादा असरदार दवाओं की तलाश में हैं.
समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी वाली महिलाओं के पीरियड्स अक्सर 40 साल की उम्र से पहले बंद हो जाते हैं। इस स्थिति में ओवेरियन फाइब्रोसिस होता है, जो फॉलिकल ग्रोथ को रोकता है। वहीं फाइनरेनोन नाम की दवा किडनी और हार्ट टिशू में फाइब्रोसिस को रोकती है।
एक क्लिनिकल ट्रायल में शोधकर्ताओं ने इस दवा को मरीजों को दी और साथ ही ओवरी स्टिमुलेशन और ओवम मैचुरेशन के लिए अन्य दवाओं का भी इस्तेमाल किया। परिणामस्वरूप, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के जरिए फर्टिलाइज्ड अंडा प्राप्त किया गया।
ट्रायल से पहले, टीम ने चूहों पर परीक्षण किया। इसमें पाया गया कि जिन चूहों को फाइनरेनोन दिया गया, उनके सामान्य से अधिक बच्चे पैदा हुए और उनमें कोई असामान्यता नहीं थी।
कवामुरा ने 2013 में “इन विट्रो एक्टिवेशन” नामक एक इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट मेथड शुरू किया था। इसमें लैप्रोस्कोपी के जरिए मरीज की ओवरी का एक हिस्सा इकट्ठा किया जाता है, फॉलिकल्स को मेडिकल एजेंट से एक्टिवेट किया जाता है और फिर उन्हें ओवेरियन मेम्ब्रेन के नीचे ट्रांसप्लांट किया जाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए जनरल एनेस्थीसिया की जरूरत होती है, जो मरीज के लिए आसान नहीं है।
टीम ने इस प्रक्रिया के समान असर वाली ओरल दवा की तलाश की। लगभग 1,300 दवाओं के परीक्षण के बाद फाइनरेनोन को सबसे प्रभावी पाया गया, जो इस स्थिति में सुरक्षित और आसान विकल्प साबित हो सकता है।